अस्वाद-व्रत अपने आप में एक महान् व्रत हैं। महात्मा गाँधी ने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की हैं और अपने सप्त महाव्रतों में इसे प्रमुख स्थान दिया हैं। सप्ताह में एक दिन भी इसे पालन किया जाय तो मन की संयम शक्ति और दृढ़ता बढ़ती हैं। यह बढ़ोत्तरी धीरे-धीरे मनुष्य में उन गुणों का भी विकास कर देती हैं जो महान् पुरुषों में होने ही चाहिये। अस्वाद-व्रत के दिन यदि एक ही समय भोजन किया जाय तो और भी उत्तम हैं। इससे पेट को विश्राम मिलेगा और राष्ट्र की खाद्य समस्या सुलझाने के लिए अन्न की मितव्ययिता का देशभक्ति पूर्ण सत्कर्म भी सहज ही बन पड़ेगा। दोपहर को भोजन लिया जाय, इसके अतिरिक्त सवेरे या रात को भूख लगे तो दूध, छाछ आदि कोई पतली चीज ली जा सकती हैं। दोपहर के भोजन में भी अनेक कटोरियाँ सजाने की अपेक्षा यदि रोटी के साथ शाक, दाल, दही , आदि में से कोई एक ही वस्तु लगा कर खाने के लिए रखी जाय तो और भी उत्तम हैं ।एक साथ अनेक प्रकार की चीजें खानें से पाचन क्रिया बिगड़ती हैं, यह सर्वविदित तथ्य हैं । स्वाद के लिए ही लोग नाना प्रकार के व्यंजन बनाते और थाल सजाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से तो जितनी कम चीजें एक साथ खाई जाय उतना ही पाचन ठीक होता हैं। इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से भी और समय की दृष्टि से भी रोटी के साथ एक ही वस्तु लगाने के लिए रखी जाय तो अधिक उपयुक्त हैं।
शनिवार, 27 दिसंबर 2014
आत्मिक और लौकिक दोनों ही लाभ
अस्वाद-व्रत अपने आप में एक महान् व्रत हैं। महात्मा गाँधी ने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की हैं और अपने सप्त महाव्रतों में इसे प्रमुख स्थान दिया हैं। सप्ताह में एक दिन भी इसे पालन किया जाय तो मन की संयम शक्ति और दृढ़ता बढ़ती हैं। यह बढ़ोत्तरी धीरे-धीरे मनुष्य में उन गुणों का भी विकास कर देती हैं जो महान् पुरुषों में होने ही चाहिये। अस्वाद-व्रत के दिन यदि एक ही समय भोजन किया जाय तो और भी उत्तम हैं। इससे पेट को विश्राम मिलेगा और राष्ट्र की खाद्य समस्या सुलझाने के लिए अन्न की मितव्ययिता का देशभक्ति पूर्ण सत्कर्म भी सहज ही बन पड़ेगा। दोपहर को भोजन लिया जाय, इसके अतिरिक्त सवेरे या रात को भूख लगे तो दूध, छाछ आदि कोई पतली चीज ली जा सकती हैं। दोपहर के भोजन में भी अनेक कटोरियाँ सजाने की अपेक्षा यदि रोटी के साथ शाक, दाल, दही , आदि में से कोई एक ही वस्तु लगा कर खाने के लिए रखी जाय तो और भी उत्तम हैं ।एक साथ अनेक प्रकार की चीजें खानें से पाचन क्रिया बिगड़ती हैं, यह सर्वविदित तथ्य हैं । स्वाद के लिए ही लोग नाना प्रकार के व्यंजन बनाते और थाल सजाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से तो जितनी कम चीजें एक साथ खाई जाय उतना ही पाचन ठीक होता हैं। इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से भी और समय की दृष्टि से भी रोटी के साथ एक ही वस्तु लगाने के लिए रखी जाय तो अधिक उपयुक्त हैं।
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