गृहस्थ जीवन की सफलता
गृहस्थ जीवन की सफलता के लिये, अनेक
कठिनाइयाँ होते हुये भी दाम्पत्य जीवन
को सुखमय बनाये रहने के लिये इस बात
की आवश्यकता है कि पति-पत्नि में प्रगाढ़ प्रेम
और अटूट विश्वास हो। इसी प्रकार जिस
कार्य में मनुष्य सफलता प्राप्त
करना चाहता है उसमें पूरा प्रेम होना और उस
कार्य के गौरव को समझना आवश्यक है।
जो कार्यक्रम अपनाया गया है उसे हलका,
ओछा, तुच्छ व्यर्थ और साधारण नहीं वरन् विश्व
का एक अत्यन्त आवश्यक और उपयोगी कार्य
मानना चाहिये। उसे करते हुये गर्व और गौरव
अनुभव किया जाना चाहिये दाम्पत्य प्रेम
की तरह हमें अपने कार्यक्रम में
भी पूरी निष्ठा, ममता अभिरुचि और
श्रेष्ठता भी रखनी चाहिये। यह भावनायें
जितनी ही गहरी होगी, कार्यक्रम
की सफलता में उतनी ही आशा बढ़ती जायेगी।
गृहस्थ जीवन की सफलता के लिये, अनेक
कठिनाइयाँ होते हुये भी दाम्पत्य जीवन
को सुखमय बनाये रहने के लिये इस बात
की आवश्यकता है कि पति-पत्नि में प्रगाढ़ प्रेम
और अटूट विश्वास हो। इसी प्रकार जिस
कार्य में मनुष्य सफलता प्राप्त
करना चाहता है उसमें पूरा प्रेम होना और उस
कार्य के गौरव को समझना आवश्यक है।
जो कार्यक्रम अपनाया गया है उसे हलका,
ओछा, तुच्छ व्यर्थ और साधारण नहीं वरन् विश्व
का एक अत्यन्त आवश्यक और उपयोगी कार्य
मानना चाहिये। उसे करते हुये गर्व और गौरव
अनुभव किया जाना चाहिये दाम्पत्य प्रेम
की तरह हमें अपने कार्यक्रम में
भी पूरी निष्ठा, ममता अभिरुचि और
श्रेष्ठता भी रखनी चाहिये। यह भावनायें
जितनी ही गहरी होगी, कार्यक्रम
की सफलता में उतनी ही आशा बढ़ती जायेगी।
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