बुधवार, 17 अगस्त 2016
मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ - संध्या कुमारी
मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ
" प्रकृति पूजक संस्कृति रक्षक आदि आनादिकाल वासी आदिवासी मूल वासी "
मैं आदिवासी समाज से प्रेम करती हूँ,मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ | मेरे आदिवासी समाज की संस्कृति अन्य समाजो से बिलकुल अलग है | और आदिवासी समाज की संस्कृति से अन्य समाजों ने कई रीती रिवाजों को अपनाया भी है |हर समाज का इतिहास प्राचीन होता है,और हर व्यक्ति को अपने समाज से प्रेम होता है |मुझे भी अपने आदिवासी समाज से लगाव है |पर जब मैं यह सब कुछ नहीं जानती थी, कि आदिवासी समाज क्या होता है ? तब कुछ भी नही समझती थी और मुझे खुद को या किसी ओर आदिवासी समाज के व्यक्ति को कोई आदिवासी कहता तो मुझे बुरा लगता था |" भारत में सिर्फ आदिवासी है एक ऐसा समुदाय जो प्रकृतिमूलक है, जिस की जीवन प्रणाली बोली परम्परा रिती-रिवाज ,पहनावा,संगीत-वाद्य, ज्ञान -कला संस्कृति व्यवहार आज भी सब से अलग है "
आज जब मैंने ये जाना की आदिवासी समुदाय इस धरा पर सबसे पहले से निवास कर रहा है |जब कोई भी नहीं था और अगर सबसे पुराना और प्राचीन समाज कोई है तो वो है आदिवासी समाज |आदिवासी समाज जितना पुराना है उतनी ही पुरानी इस समाज की संस्कृति है | जो की आज भी मेरे आदिवासी समाज में मुझे देखने को मिलती है | इतना ही नहीं बल्कि आज का युग जो की कई क्रांतियों से भरा पड़ा है,जैसे वैज्ञानिक क्रांति,श्वेत क्रांति,हरित क्रांति आदि | इसके बावजूद भी मेरा आदिवासी समाज हर रिवाज को पूरी तन्मयता के साथ निभाता आ रहा है |
" हजारो-हजार साल का जिन्दा इतिहास हु में,मुझे आदिवासी कहते है,
मुझे गर्व है की मैं आदिवासी हूँ,क्योंकि मेरा आदिवासी समाज कभी किसी का गुलाम नहीं हुआ |मेरे समाज ने ही तो जो राजपूत क्षत्रिय थे उन्हें अपने क्षेत्र में पनाह दी,और उनकी उनके शत्रुयो से रक्षा की थी | आज भी अगर किसी कार्य को करना होता है तो सबसे पहले आदिवासी समुदाय को याद किया जाता है | हमारे भारत देश के कई कार्य जिसमे मकान बनाना,हमारे शहरो में बनने वाले कई तरह के भवनों के कार्य,खेती करने वाले लोग भी मेरे आदिवासी समाज के है |मेरे आदिवासी समाज के कई महान पुरुषो ने भारत की आज़ादी के लिए भी अपना योगदान दिया है लेकिन कही किताबो में मुझे उनके विषय में ज्यादा पढ़ने को नहीं मिला |मैं यहाँ दो उदाहरण देना चाहूंगी १.बांसवाड़ा के मानगढ धाम की घटना और २.सिरोही के भुला में लिलुडी बड़ली की घटना मुझे मेरे आदिवासी समाज के योगदान की याद दिलाता है |मैं इस बात से हमेशा खुश रहती हूँ की कुदरत ने मुझे आदिवासी समाज में जन्म दिया |
" हजारो-हजार साल का जिन्दा इतिहास हु में,मुझे आदिवासी कहते है,
जैव विविधता को अपने में समेटे | कहते है मैं हजारो हजार साल एक साथ जीता हु,
आज मेरे बच्चे हजार साल पुरानी संस्कृति भी जीते है तो आज की आधुनिक संस्कृति भी "
" मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ क्योंकि मैं इस धरती कि मूलवासी हूँ,मेरी अपनी संस्कृति है ,
मेरी अपनी भाषा है हम किसी पर आश्रित नहीं है ,हमारा अपना वजूद है
आदिवासी न तो आस्तिक है, न तो नास्तिक है ,आदिवासी वास्तविक है "
एक बात जो मेरे मन के भीतर है वह यह कि मेरी तरह मेरे समाज के और भी कई युवा साथी जो कि अपने आपको आदिवासी कहने में शर्म महसूस करते है, वो इसीलिए क्योंकि वो आदिवासी का सही अर्थ एवम उसका अपना महत्व नहीं जानता |जब आज मैं आदिवासी होने पर गर्व कर रही हूँ तो मुझे आशा है कि मेरे आदिवासी समाज का हर व्यक्ति अपने आप पर गर्व करके कहेगा कि मैं आदिवासी हूँ |और मुझे भी इस बात पर गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ |
'' चलती रहूंगी मैं पथ पर चलने मे माहिर बन जाऊँगी ,
मेरी अस्मिता को उजागर करुँगी मेरी संस्कृति का एक अंग बनूँगी "
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मामेर
कोटड़ा तहसील, जिला उदयपुर, राजस्थान
नाम - संध्या कुमारी
कक्षा - 12th
विषय - मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ
शुक्रवार, 12 अगस्त 2016
विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन
ये दिन सयुक्तं राष्ट्र सघं द्वारा घोषित दिन हे जिसकी जानकारी स्वम आदिवासी समुदाय के लोगों को और स्कूल में पढने वाले बच्चो को नही थी। इस प्रतियोगिता के जरिये वो अपने आदिवासी दिन को जानने के साथ अपने आदिवासी होने पर गर्व करे इस उद्देश्य से रखी इस प्रतियोगिता का सफल आयोजन हुआ।
निबंध लेखन प्रतियोगिता में कोटडा तहसील की कुल 20 स्कूल के 250 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
ये निबंध प्रतियोगिता स्कूल द्वारा स्कूल मे ही आयोजित की गई थी।
आज मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
स्थान - राजकीय महाविद्यालय कोटडा ( उदयपुर )राजस्थान विश्व आदिवासी दिवस पर निबंध लेखन प्रतियोगिता में चुने टोप 10 और तीन प्रथम,द्वितीय और तृतीय क्रम पर रहे विद्यार्थियों को किया सम्मानित
प्रथम - संध्या कुमारी – XII ( राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय मामेर)
द्वितीय- ललीता तराल - XI (राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विदयालय कोटडा)
तृतीय -लालूराम पारगी - XI (राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाद )
टोप टेन की सुची
१.लालूराम पारगी (X) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय मामेर
२.जमना कुमारी (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाद
३. रेखा कुमारी (XII) राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विदयालय कोटडा
४.बंशीलाल गमार (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाडी
५.रमेश कुमार (XI) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय बडली
६. ललीता कुमारी (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाद.
८.लीला कुमारी (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाडी
९.चंदनलाल गमार (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाडी
१०.सुनीता ग्रासिया (XI) राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विदयालय कोटडा
कार्यक्रम के अतिथी रहे के.एल डिंडोर जी (प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोटडा)
शनिवार, 30 जनवरी 2016
मौताणा
मौताणा – ये एक आदिवासी समुदाय में चलने वाली परम्परा है | इस परंपरा में लाश के बदले पैसे की मांग की जाती है | जो पूरे उदयपुर संभाग में, खास तौर पर आदिवासी बाहुल्य जिलों-प्रतापगढ़, डूंगरपुर और बांसवाडा में बहुप्रचलित है। दुर्घटना में या अप्राकृतिक परिस्थितियों में मौत हो जाने पर सारी की सारी आदिवासी आबादी 'दोषी' या अपराधी का तब तक घेराव रखती है, जब तक उसके द्वारा नकद मुआवजे और सारे समुदाय के लिए देसी-दारू का इंतजाम नहीं कर दिया जाता | इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों की तरफ़ से सौदेबाज़ी आम बात है। कई बार तो 'मौताणा' की रकम तय होने तक शव का अंतिम संस्कार तक नहीं किया जाता, भले इसमें कई कई घंटे लग जाएँ या कई दिन! जुर्माने की रकम कुछ सौ से कुछ लाख तक भी हो सकती है। आदिवासियों की 'जातिगत-पंचायत' ही बहुत बार छोटे-मोटे अपराधों का फैसला करती है और दोषियों पर जुर्माने ठोकती है, पुलिस-कचहरी का नंबर तो बाद में तब आता है, जब मामला जाति-पंचायत के हाथ से निकल जाय |
राजस्थान के आदिवासी इलाकों की परंपरा है मौताणा
राजस्थान के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में हर साल सैकड़ों मामलों में मौताणे को लेकर सौदेबाजी सामने आती है। इसमें मृत्यु के लिए जिम्मेदार को मौत का मुवाजा मौताणा देना होता है। मौताणा की कुल राशि का दस फीसदी पंचों में, पच्चीस फीसदी पीड़ित परिवार और बाकी कुटुंब के सभी लोगों में बराबर बांटी जाती है। मौताणा देने के लिए भी देने वाले के परिवार के सभी लोग रकम इकठ्ठा करते हैं। इसमें भी परिवार की नजदीकी के हिसाब से हिस्सा तय होता है। जिस परिवार से मौताणा लिया जाता है, उसे पच्चीस फीसदी देना होता है और बाकी परिजन और रिश्तेदार मिलकर देते हैं।
मौताणा ना देने पर जबरन लेते हैं चढ़ोतरा
मौताणा नहीं देने पर चढ़ोतरा नाजिल किया जाता है। जिसके अनुसार संबंधित परिवारों के घर लूटे जाते हैं और बाद में आग लगा दी जाती है। चढ़ोतरा में केवल परिवार के पुरुषों के साथ ही मारपीट की जाती है। महिला सदस्य और परिवार के बाहर के लोगों के साथ मारपीट नहीं की जाती। इस बारे में फैसले के सारे अधिकार पंचों के पास होते हैं।इस परंपरा में बदलाव के लिए आदिवासी समुदाय को एकजुट होना होगा |युवा पीढ़ी को जागरूक किया जाये तो अच्छा बदलाव आ सकता है |
गुरुवार, 14 जनवरी 2016
आधार कार्ड योजना से परेशान आम जनता
भारत सरकार ने आधार कार्ड की जो योजना निकाली है वह बहुत अच्छी है,इससे हर व्यक्ति को अपनी पहचान मिलेगी चाहे वो छोटा हो या बड़ा | भारत के कई राज्यों में अधिकतर लोगो ने अपने आधार कार्ड बनवाये है |
कई लोग अपना आधार कार्ड अभी भी बनवा रहे है | राजस्थान राज्य के कई जिलो में लोगो ने अभी भी अपना आधार कार्ड नहीं बनवाया,इसकी वजह ये है की वो जहा रहते है वहा इ-मित्र सुविधा तो उपलब्ध है मगर आधार कार्ड मशीन नहीं है | जिनके पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें राशन कार्ड पर मिलने वाली वास्तु भी बंद कर डी गई है | इसलिए हर व्यक्ति के लिए आधार कार्ड बनवाना जरुरी हो गया है | लोग अपना आधार कार्ड बनवाने के लिए पास के किसी शहर में जाते है जहा पर उनसे जो वहा इ-मित्र होते है वो 100 से 150 रूपये की मांग करते है | लोग अपनी खेती छोड़कर समय निकलकर आते है | कई बार तो आधार कार्ड बन जाता है कई बार नहीं भी बन पाता | आधार कार्ड निशुल्क बनता है | ये बात हर कोई नहीं जानता | सरकार ने ये जो योजना निकली है इसके लिए उचित व्यवस्था करनी होगी | सरकार की इस योजना की वजह से आम जनता अधिक परेशान हो रही है |
देश में जिस तरह पढने के लिए सरकारी और निजी स्कूल कोलेज है,इलाज के लिए जेसे सरकारी और निजी अस्पताल है उसी तरह आधार कार्ड के लिए इ-मित्र चल रहे है उन्हें बंद करवाना होगा |
अन्यथा जनता अभी जगी नहीं है जिस दिन जागी उस दिन तूफान आ सकता है |
जागरूक युवा होने के नाते मेरा फर्ज बनता है की मै देश के युवा साथियो को जागरूक सरकार के समस्त अधिकारियो से मेरा निवेदन है की जल्द ही इसके लिए उचित कदम उठाया जाये |
साथियो इस बात को हर अधिकारी और जिन्होंने इस योजना की शुरुआत की उन तक हमारी इस बात को पहुचाना होगा |
हर कोई इसे साझा करे और अन्य लोगो तक पहुचाये |
कई लोग अपना आधार कार्ड अभी भी बनवा रहे है | राजस्थान राज्य के कई जिलो में लोगो ने अभी भी अपना आधार कार्ड नहीं बनवाया,इसकी वजह ये है की वो जहा रहते है वहा इ-मित्र सुविधा तो उपलब्ध है मगर आधार कार्ड मशीन नहीं है | जिनके पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें राशन कार्ड पर मिलने वाली वास्तु भी बंद कर डी गई है | इसलिए हर व्यक्ति के लिए आधार कार्ड बनवाना जरुरी हो गया है | लोग अपना आधार कार्ड बनवाने के लिए पास के किसी शहर में जाते है जहा पर उनसे जो वहा इ-मित्र होते है वो 100 से 150 रूपये की मांग करते है | लोग अपनी खेती छोड़कर समय निकलकर आते है | कई बार तो आधार कार्ड बन जाता है कई बार नहीं भी बन पाता | आधार कार्ड निशुल्क बनता है | ये बात हर कोई नहीं जानता | सरकार ने ये जो योजना निकली है इसके लिए उचित व्यवस्था करनी होगी | सरकार की इस योजना की वजह से आम जनता अधिक परेशान हो रही है |
देश में जिस तरह पढने के लिए सरकारी और निजी स्कूल कोलेज है,इलाज के लिए जेसे सरकारी और निजी अस्पताल है उसी तरह आधार कार्ड के लिए इ-मित्र चल रहे है उन्हें बंद करवाना होगा |
अन्यथा जनता अभी जगी नहीं है जिस दिन जागी उस दिन तूफान आ सकता है |
जागरूक युवा होने के नाते मेरा फर्ज बनता है की मै देश के युवा साथियो को जागरूक सरकार के समस्त अधिकारियो से मेरा निवेदन है की जल्द ही इसके लिए उचित कदम उठाया जाये |
साथियो इस बात को हर अधिकारी और जिन्होंने इस योजना की शुरुआत की उन तक हमारी इस बात को पहुचाना होगा |
हर कोई इसे साझा करे और अन्य लोगो तक पहुचाये |
भारतीय जागरूक युवा संगठन – एक कदम बदलाव की ओर
सोमवार, 16 नवंबर 2015
एकबकीओ
भारतीय आदिवासी समुदाय मे जो आदिवासी लोगो का इतिहास मिटाया गया है.ओर साथ ही साथ इस समाज मे चलने वाली कुप्रथा पर प्रतिबंध लगाया जाए ओर आदिवासी अपना अधिकार प्राप्त करे. अपनी भारतीय परम्परा को इसी तरह बनाए रखे इसलिए इस समूह को बनाया गया है आप सभी भाई बहनो से निवेदन है की आप हमारे इस आदिवासी समुदाय की पहचान को बनाए रखने मे पूरा सहयोग करेंगे !
शुक्रवार, 25 सितंबर 2015
सरकारे आलियो पेसा कानून
सरकारे आलियो पेसा कानून -२
पेसा कानून मा शांति समिति -2
सरकारे आलियो पेसा कानून -२
पेसा कानून ग्रामसभा बनावे - २
शांति समिति ग्रामसभा बनावे -२
शांति समिति दूर करे कुटाला -२
दूर करे कुटाला ने शांति समिति बनावे - २
थोने जवानी जरूर नीही -२
शांति समिति हारू कोम करे है -२
हारू कोम करे है ने शांति बनावे -२
भूलमा थोने कोई जाये तो -२
शांति समिति ये रिपोट आले -2
होप्लो गोम वाला मनख -2
शांति समति हव बनी गेई -2
थोने मो जाजो गोमे वाला मनख - २
थोने जाओ होतो लूटी लेहे -२
शांति समिति दूर करे कुटाला -२
दूर करे कुटाला ने शांति समिति बनावे - २
सरकारे आलियो पेसा कानून -२
पेसा कानून मा शांति समिति - २
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