शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन

रेडियो मधुबन 90.4 FM एंव आदिवासी जागरूक युवा संगठन कोटडा़ ने विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष में निबंध प्रतियोगिता

का आयोजन किया। विश्व आदिवासी दिवस आने वाली 9 अगस्त को हे।
ये दिन सयुक्तं राष्ट्र सघं द्वारा घोषित दिन हे जिसकी जानकारी स्वम आदिवासी समुदाय के लोगों को और स्कूल  में  पढने वाले बच्चो को नही थी। इस प्रतियोगिता के जरिये वो अपने आदिवासी दिन को जानने के साथ अपने आदिवासी होने पर गर्व करे इस उद्देश्य से रखी इस प्रतियोगिता का सफल आयोजन हुआ।
निबंध लेखन प्रतियोगिता में कोटडा तहसील की कुल 20 स्कूल के 250 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
ये निबंध प्रतियोगिता स्कूल द्वारा स्कूल मे ही आयोजित की गई थी।
आज मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस                   
स्थान - राजकीय महाविद्यालय कोटडा ( उदयपुर )राजस्थान विश्व आदिवासी दिवस पर निबंध लेखन प्रतियोगिता में चुने टोप 10 और तीन प्रथम,द्वितीय और तृतीय क्रम पर रहे विद्यार्थियों को किया सम्मानित
प्रथम - संध्या कुमारी – XII ( राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय मामेर)                   
द्वितीय- ललीता तराल - XI (राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विदयालय कोटडा)
तृतीय -लालूराम पारगी - XI (राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाद )

टोप टेन की सुची                
१.लालूराम पारगी (X) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय मामेर                 
२.जमना कुमारी (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाद                
 ३. रेखा कुमारी (XII) राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विदयालय कोटडा
४.बंशीलाल गमार (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाडी             
 ५.रमेश कुमार (XI) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय बडली               
६. ललीता कुमारी (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाद.                
७.रायचंद (XI) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाद                
८.लीला कुमारी (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाडी              
९.चंदनलाल गमार (XII) राजकीय उच्च माध्यमिक विदयालय महाडी             
 १०.सुनीता ग्रासिया (XI) राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विदयालय कोटडा

कार्यक्रम के अतिथी रहे के.एल डिंडोर जी (प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोटडा)

शनिवार, 30 जनवरी 2016

मौताणा

मौताणा – ये एक आदिवासी समुदाय में चलने वाली परम्परा है | इस परंपरा में लाश के बदले पैसे की मांग की जाती है | जो पूरे उदयपुर संभाग में, खास तौर पर आदिवासी बाहुल्य जिलों-प्रतापगढ़, डूंगरपुर और बांसवाडा में बहुप्रचलित है। दुर्घटना में या अप्राकृतिक परिस्थितियों में मौत हो जाने पर सारी की सारी आदिवासी आबादी 'दोषी' या अपराधी का तब तक घेराव रखती है, जब तक उसके द्वारा नकद मुआवजे और सारे समुदाय के लिए देसी-दारू का इंतजाम नहीं कर दिया जाता | इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों की तरफ़ से सौदेबाज़ी आम बात है। कई बार तो 'मौताणा' की रकम तय होने तक शव का अंतिम संस्कार तक नहीं किया जाता, भले इसमें कई कई घंटे लग जाएँ या कई दिन! जुर्माने की रकम कुछ सौ से कुछ लाख तक भी हो सकती है। आदिवासियों की 'जातिगत-पंचायत' ही बहुत बार छोटे-मोटे अपराधों का फैसला करती है और दोषियों पर जुर्माने ठोकती है, पुलिस-कचहरी का नंबर तो बाद में तब आता है, जब मामला जाति-पंचायत के हाथ से निकल जाय |
 
राजस्थान के आदिवासी इलाकों की परंपरा है मौताणा
राजस्थान के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में हर साल सैकड़ों मामलों में मौताणे को लेकर सौदेबाजी सामने आती है। इसमें मृत्यु के लिए जिम्मेदार को मौत का मुवाजा मौताणा देना होता है। मौताणा की कुल राशि का दस फीसदी पंचों में, पच्चीस फीसदी पीड़ित परिवार और बाकी कुटुंब के सभी लोगों में बराबर बांटी जाती है। मौताणा देने के लिए भी देने वाले के परिवार के सभी लोग रकम इकठ्ठा करते हैं। इसमें भी परिवार की नजदीकी के हिसाब से हिस्सा तय होता है। जिस परिवार से मौताणा लिया जाता है, उसे पच्चीस फीसदी देना होता है और बाकी परिजन और रिश्तेदार मिलकर देते हैं।
मौताणा ना देने पर जबरन लेते हैं चढ़ोतरा
मौताणा नहीं देने पर चढ़ोतरा नाजिल किया जाता है। जिसके अनुसार संबंधित परिवारों के घर लूटे जाते हैं और बाद में आग लगा दी जाती है। चढ़ोतरा में केवल परिवार के पुरुषों के साथ ही मारपीट की जाती है। महिला सदस्य और परिवार के बाहर के लोगों के साथ मारपीट नहीं की जाती। इस बारे में फैसले के सारे अधिकार पंचों के पास होते हैं।इस परंपरा में बदलाव के लिए आदिवासी समुदाय को एकजुट होना होगा |युवा पीढ़ी को जागरूक किया जाये तो अच्छा बदलाव आ सकता है |
 
 
 
 
 
 
 
 
 

गुरुवार, 14 जनवरी 2016

आधार कार्ड योजना से परेशान आम जनता

भारत सरकार ने आधार कार्ड की जो योजना निकाली है वह बहुत अच्छी है,इससे हर व्यक्ति को अपनी पहचान मिलेगी चाहे वो छोटा हो या बड़ा | भारत के कई राज्यों में अधिकतर लोगो ने अपने आधार कार्ड बनवाये है |
कई लोग अपना आधार कार्ड अभी भी बनवा रहे है | राजस्थान राज्य के कई जिलो में लोगो ने अभी भी अपना आधार कार्ड नहीं बनवाया,इसकी वजह ये है की वो जहा रहते है वहा इ-मित्र सुविधा तो उपलब्ध है मगर आधार कार्ड मशीन नहीं है | जिनके पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें राशन कार्ड पर मिलने वाली वास्तु भी बंद कर डी गई है | इसलिए हर व्यक्ति के लिए आधार कार्ड बनवाना जरुरी हो गया है | लोग अपना आधार कार्ड बनवाने के लिए पास के किसी शहर में जाते है जहा पर उनसे जो वहा इ-मित्र होते है वो 100 से 150 रूपये की मांग करते है | लोग अपनी खेती छोड़कर समय निकलकर आते है | कई बार तो आधार कार्ड बन जाता है कई बार नहीं भी बन पाता | आधार कार्ड निशुल्क बनता है | ये बात हर कोई नहीं जानता | सरकार ने ये जो योजना निकली है इसके लिए उचित व्यवस्था करनी होगी | सरकार की इस योजना की वजह से आम जनता अधिक परेशान हो रही है |
देश में जिस तरह पढने के लिए सरकारी और निजी स्कूल कोलेज है,इलाज के लिए जेसे सरकारी और निजी अस्पताल है उसी तरह आधार कार्ड के लिए इ-मित्र चल रहे है उन्हें बंद करवाना होगा |
अन्यथा जनता अभी जगी नहीं है जिस दिन जागी उस दिन तूफान आ सकता है |
जागरूक युवा होने के नाते मेरा फर्ज बनता है की मै देश के युवा साथियो को जागरूक सरकार के समस्त अधिकारियो से मेरा निवेदन है की जल्द ही इसके लिए उचित कदम उठाया जाये |
साथियो इस बात को हर अधिकारी और जिन्होंने इस योजना की शुरुआत की उन तक हमारी इस बात को पहुचाना होगा |
हर कोई इसे साझा करे और अन्य लोगो तक पहुचाये |
भारतीय जागरूक युवा संगठन – एक कदम बदलाव की ओर

सोमवार, 16 नवंबर 2015

एकबकीओ

भारतीय आदिवासी समुदाय मे जो आदिवासी लोगो का इतिहास मिटाया गया है.ओर साथ ही साथ इस समाज मे चलने वाली कुप्रथा पर प्रतिबंध लगाया जाए ओर आदिवासी अपना अधिकार प्राप्त करे. अपनी भारतीय परम्परा को इसी तरह बनाए रखे इसलिए इस समूह को बनाया गया है आप सभी भाई बहनो से निवेदन है की आप हमारे इस आदिवासी समुदाय की पहचान को बनाए रखने मे पूरा सहयोग करेंगे !

शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

सरकारे आलियो पेसा कानून

सरकारे आलियो पेसा कानून -२
पेसा कानून मा शांति समिति -2
सरकारे आलियो पेसा कानून -२
पेसा कानून ग्रामसभा बनावे - २
शांति समिति ग्रामसभा बनावे -२
शांति समिति दूर करे कुटाला -२
दूर करे कुटाला ने शांति समिति बनावे - २
थोने जवानी जरूर नीही -२
शांति समिति हारू कोम करे है -२
हारू कोम करे है ने शांति बनावे -२
भूलमा थोने कोई जाये तो -२ 
शांति समिति ये रिपोट आले -2
होप्लो गोम वाला मनख -2
शांति समति हव बनी गेई -2
थोने मो जाजो गोमे वाला मनख - २
थोने जाओ होतो लूटी लेहे -२
शांति समिति दूर करे कुटाला -२
दूर करे कुटाला ने शांति समिति बनावे - २
सरकारे आलियो पेसा कानून -२
पेसा कानून मा शांति समिति - २

रविवार, 2 अगस्त 2015

एक प्रेरणा - नवली कुमारी

जीवन की कई तरह की परेशानियों से झूझते हुए,
अपने माता पिता को खोने का  दुःख भी ,
दुःख हुआ पर इतना नहीं की वो दुःख उसे तोड़ पाता,
उसके दुःख ने ही उसे आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया,
उसकी तो पढाई,छूट गई पर किसी और की न छूटे ये तमन्ना 
उसकी इसी तम्मना ने उसे बहुत आगे तक पहुचाया 
गाव के लोग भी उससे खुश हुए,
सबकी चाहत हुई उसे अपना जनप्रतिनिधि बनाने की,
देर नहीं की लोगो ने और उसे अपना वार्डपंच बना ही दिया 
वार्डपंच तो नवली बन गई,
पर उसे न कुछ ज्ञान था राजनीति का,
तभी एक अलख जगी जनचेतना की,
उसी से जाना विकास और गाव के काम,
लग गई अपने गाव को बेहतर बनाने में,
काम ऐसा किया की मिसाल बन गई,
मिला सुनहरा मौका उसको विदेश जाने का,
विदेश गई तो अपनी जैसी महिलाओ को जागरूक कर आई ,
देखा उसने वो वहां जो उसे यहाँ करने की ठानी,
आई विदेश से तो  हुए उसके गाव के खुश लोग,
आकर उसने काम वो किया,
शिक्षा में अलख जगाई,
जो नहीं भेजते थे अपने बच्चो को स्कूल,
उन्हें समझाया उन्हें योजनाये बताई,
फिर भी जो न भेजे उसका राशन पानी बंद करवाया,
क्या बताऊ उसके बारे में ,है वो ऐसी नवली 
कहती है शादी नहीं करुँगी,
जब तक न हो समाज में बदलाव,
जरुरत है ऐसे युवाओ की इस समाज को,
जो बदले समाज,जो बदले समाज  

नवली की एक झलक

नवली कुमारी गरासिया मूलत राजस्थान राज्य सिरोही जिले की आबूरोड तहसील की पंचायत क्यारियाँ के रेडवा कला गाव की निवासी है ! जिसकी उम्र वर्तमान में २५ है ! नवली कुमारी आदिवासी परिवार से है जो की रेडवाकला पहाड़ी क्षेत्र में है ! नवली के परिवार मेँ उसके ९ बहने और दो भाई थे ! उनकी माता की भी मृत्यु उनके पिता के कुछ समय बाद ही हो गई ! घर मेँ नवें नम्बर के होने से उनका नाम नवली रखा गया ! पापा बीएसएनएल विभाग मेँ कार्य करते थे ! इस वजह से वे बहार रहते थे ! नवली ने अपनी १२वीं तक की पढाई आबूरोड की अर्बुद स्कूल से की ! इसी बीच उनके पापा की मृत्यु होने से नवली की आगे की पढाई नहीं हो पाई ! घर की परिस्थिति सही न होने से पहले वो आबूरोड शहर में रहती थी वहाँ से अपने गाव में आ गई !
गाव में आई तो उसने देखा की गाव में जो स्कूल है वहां पर बच्चे पढ़ने में रूचि नहीं ले रहे,और उनके माता पिता भी ध्यान नहीं दे रहे है ! उसे लगने लगा की क्यों न में अपनी पढाई का उपयोग इन बच्चो के लिए करू ! पर उसे ये नहीं समझ आ रहा था की वो कैसे कुछ करे ! उसे अपने गाव के अंदर बहुत सी समस्याएं और भी नजर आने लगी जैसे पानी की कमी,बिजली,रास्ते आदि ! उसे ये तो लगता था की इसके लिए कुछ करना चाहिए पर कैसे ये सबसे बड़ा सवाल था ! उन्ही दिनों गर्ल्स एजुकेशन ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ता उनके गाव में लड़कियों की शिक्षा के लिए सर्व कर रहे थे और वे खोज कर रहे थे की कही कोई शिक्षित लड़की मिले जो मुझे इस काम में मदद करे ! नवली को रास्ता चाहिए था की कैसे वो गाव की लड़कियों के लिए पढाई के लिए कुछ कदम उठाये ! रास्ता मिलते ही नवली ने अपनी कमान को तेज कर दिया ! जब वो लड़कियों के माता पिता को समझाने के लिए जाती तो उसे कही जगह गालिया और डांट भी खाने को मिली ! पर नवली ने हिम्मत नहीं हारी और ४६ के आसपास लड़कियों को शिक्षा से जोड़ा और २ के बाल विवाह भी रुकवाये !
नवली अपने गाव के लिए अपने स्तर पर तो काम कर ही रही थी, लेकिन उसे लगा की अगर मेरे पास पावर होगा अर्थात सत्ता होगी तो शायद लोग मेरी बात को जरूर मानेगे ! उन दिनों २०१० में चुनाव का माहोल चल रहा था ! तभी नवली वार्डपंच के चुनाव के लिए लड़ी और विजेता भी बनी ! सच तो ये है की इस गाव के लोग ही चाहते थे की नवली गाव की वार्डपंच बने ! जैसे ही नवली गाव के अपने वार्ड की वार्डपंच बनी तो उसने गाव की महिलाओ को पानी की ज्यादा समस्या थी उसके लिए हेडपम्प जो ख़राब थे उसे सही करवाया और पानी की सही व्यवस्था की ताकि जिन महिलाओ को बहुत ही ज्यादा दुरी से पानी लाना पड़ता था उन्हें राहत मिली ! गाव की सड़क को सही करवाया और खास तौर पर स्कूल के बच्चो के लिए बहुत ही सराहनीय कदम उठाया ! जो स्कूल गाव मेँ बंद था उसे शुरू करवाया ! जो स्कूल ५ वी तक था उसे ८ वी तक करवाया !
नवली ने बताया की " मै जब वार्डपंच बनीं तो मुझे नहीं पता था की मै कैसे ये सब करूंगी ! पर स्थानीय जनचेतना संस्थान से मुझे और साथ मेँ और भी लोगो को ट्रेनिंग दी ! की किस तरह आप गाव मेँ काम कर सकते है और अपने गाव का विकास कर सकते है ! मुझे वहीं से बहुत कुछ सिखने को मिला और इस तरह मेने अपने गाव के लिए बहुत ही अच्छा काम किया ! "
नवली ने अपने काम को बड़ी ही सीदत और ईमानदारी के साथ निभाया ! और नवली के इस काम को देखकर स्थानीय जनचेतना संस्थान ने उन्हें विदेश जाने का एक सुनहरा मौका प्रदान किया ! नवली को ऑस्ट्रेलिया जाने का जो मौका मिला उसका नवली ने भरपूर लाभ दिया ! नवली ने वहां भी जिस तरह शिक्षा की बात अपने गाव मेँ करती थी वो भी की ! नवली को वहां से जानने को मिला की वहां महिलाओ को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता है ! उन्हें वहां 33 % आरक्षण  दिया हुआ है और राजस्थान मेँ ५०%  ! नवली का कहना है की वहां की महिलाओ ने उन्हें कहा की आप इतनी कम उम्र मेँ इतने आगे बढ़ गए हम भी बढ़ना चाहते है ! नवली को ये सुनकर बढ़ा अजीब तो लगा पर ये ही सच था ! और नवलीं ने वहां महिला कैसे आगे बढ़ सकती है इसके लिए बहुत अच्छा अपना स्वम् का उदहारण प्रस्तुत किया !
नवली जब भारत आई तो उसे यहाँ और वहां मेँ काफी अंतर लगा ! वहां की साफ सफाई अलग ही थी ! वहां पहाड़ी एरिया होते हुए भी बिजली थी ! और उसे लगा की अभी भी हमारे गाव मेँ बिजली नहीं है ! उसने देखा की उनके पहाड़ी एरिया जहा नल की व्यवस्था नहीं हो सकती वहां भी नल की अच्छी वयवस्था थी ! और नवली ने चाहा की मेँ अपने गाव को भी बदलूंगी !
जिन बच्चो के माता पिता बच्चो को पढ़ने नहीं भेजते थे उनका राशन का सामान बंद करवाने की हिदायत देकर उन्हें अपने बच्चे को पढ़ने भजने के लिए प्रेरित किया ! लोगो को शिक्षा की योजना की सही जानकारी दी ! लोग कहते की मेरे घर का काम कौन करेगा उन्हें समझाया ! और उन्हें विश्वास दिलाया की आपका बच्चा पढ़ेगा तो वो सुखी जी पायेगा ! तब जाकर उन्होंने उन्हें भेजना शुरू किया !
नवली कहती है " जब तक मेँ अपने समाज को आगे न बढ़ाऊ तब तक शादी नही करुँगी ! " जैसे हर लड़की को ये लगता है की उसका खुद का एक परिवार हो,उसके बच्चे होंगे,और वो अपने जीवन साथी के साथ ख़ुशी से रहे ! पर नवली का अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है ! वो खुद भी आगे बढ़ना चाहती है और अपने समाज को भी आगे ले जाना चाहती है !
नवली एक छोटे से गाव से जरूर है पर वो आदिवासी समुदाय के लिए एक प्रेरणा है,अगर नवली जैसी और भी बालिकाये इस समुदाय मेँ जन्म ले तो शायद  भारत देश का नक्शा बदल सकता है !